Brajesh Singh

Poetry

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उड़ता- फिरता सा रहता है..!

उड़ता- फिरता सा रहता है
मन भँवरे सा क्यों रहता है?

कल तक वो जो हमसाया था
बेगाना सा क्यों रहता है?
 
बरसों बीते बिछड़े फिर भी
तुम सा मुझ में क्यों रहता है?
  
जब भी हम तुम मिल जाते हैं
अफ़वाहों सा क्यों रहता है?
  
आँखें तो सब कह देतीं पर
धुँआ-धुँआ सा क्यों रहता है?
 
पैसे वालों की बस्ती में
सन्नाटा सा क्यों रहता है?
 
सागर पर बादल ही बादल
खेत आग सा क्यों रहता है?

 

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